चंद बातें: पंकज दुबे

'वो तिल नहीं, तिलिस्म थे। वो रोने आयी थी या प्यार जताने, ये तो पैक्स को भी नहीं पता था। उसे बस पता था ये पल उसके लिए सबसे ख़ास है।' ---'लूज़र कहीं का' पंकज दुबे जी एक लेखक, पटकथा लेखक एवं निर्देशक हैं। उन्होंने लंदन के कॉवेन्ट्री यूनिवर्सिटी से अप्लाइड कम्युनिएशन में

पुस्तक समीक्षा: द फिलॉसॉफर्स स्टोन — प्रेम एस गुर्जर

‘लोग आगे बढ़ने में इतना डरते क्यों हैं? किनारे से ही हार मान लेना कितना सरल है। बहुत कम लोग होते हैं जो पूर्ण निष्ठा से अपनी नियति को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। ‘ प्रेम एस गुर्जर  , फिलॉसोफेर्स स्टोन फिलॉसॉफर्स स्टोन कहानी है एक चरवाहे की जो अलग अलग तरह की किताबों

चंद बातें — सत्य व्यास

‘प्रेम,पानी और प्रयास की अपनी ही जिद होती है और अपना ही रास्ता।’ 'दिल्ली दरबार' सत्य व्यास जी हिंदी के सफल लेखकों में एक हैं। बनारस टाकीज़ उनकी पहली किताब है जो सफ़ल भी रही पर उनकी दूसरी किताब ‘दिल्ली दरबार’ {समीक्षा यहाँ पढ़ सकते हैं} काफी चर्चा में रही। इनकी कहानियों में

चंद बातें : दिव्य प्रकाश दुबे

ये किस्से हैं तुम्हारे, तुमसा ही बोलते हैं। फुर्सत से तुम मिलो तो, सब राज़ खोलते हैं। अपने पुराने कल को, तुम आज का पता दो। वो भी तो हैं तुम्हारे, इतना कभी जाता दो। इन सब कहानियों के, हीरो तो यार तुम हो, कंधे पे हाथ रखकर पहला कदम बढ़ा दो।   ये शब्द हैं दिव्य

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