पुस्तक समीक्षा : एक सेंचुरी काफी नहीं — सौरव गांगुली (गौतम भट्टाचार्य के साथ)

जगरनॉट बुक्स द्वारा प्रकाशित सौरव गांगुली की बायोग्राफी, एक सेंचुरी काफी नहीं, बड़े दिनों से चर्चा में थी। वैसे भी गांगुली भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रख्यात और कुछ हद तक विवादित शख्शियतों में से एक हैं इसीलिए जब ये पुस्तक पढ़ने का मौका मिला तो उम्मीद बढ़ना लाजिमी था।

जब कोई पाठक किसी की आत्मकथा पढता है तो वो ये अपेक्षा करता है कि इसमें उसे ऐसी कुछ बातें जानने को मिलेंगी जो पहले कभी सुनी नहीं गयी। जो कुछ भी इसमें कहा जाएगा को सही होगा। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात कि इसमें उस व्यक्ति के हर पहलु के बारे में जानकारी मिलेगी।

इस पुस्तक में ये तीनो चीजें इतनी सही नहीं बैठती क्योंकि कहानी क्रिकेट से शुरू होती है और क्रिकेट पर ही ख़त्म हो जाती है। गांगुली के बचपन, परिवार, दोस्त, खेल की वास्तविक शुरुआत, पढाई और खेल का सामंजस्य, खेल की चुनौतियाँ इन सभी चीजों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है।

जब हम छोटे थे तो गांगुली और डोना की प्रेम कहानी बड़ी चर्चित थी। कुछ किस्से प्रचलित थे जैसे कि डोना हमेशा ऑफ साइड में बैठती थी और गांगुली केवल उसी ओर शॉट खेलने के कारण ऑफ साइड के भगवान बन गए इत्यादि। आशा थी कि इन दोनों के बारे में ऐसा कुछ अनसुना पढ़ने को मिलेगा किन्तु ये पुस्तक यहाँ भी निराश करती है।

अब आते हैं खेल पर। किसी भी अंतर्राष्ट्रीय खिलाडी के जीवन में उस स्तर  पर पहुंचने से पहले घरेलु क्रिकेट की बड़ी भूमिका होती है। टीवी पर तो सबने सौरव को देखा ही है लेकिन उससे पहले का जीवन कैसा था और घरेलु खेल के क्या अनुभव थे उसका कोई जिक्र नहीं है।

इससे वो मेहनत नहीं झलकती जिसने गांगुली को गांगुली बनाया।

एक खिलाडी की आत्म-कथा में सबसे आकर्षण तब पैदा होता है जब वो अन्य दूसरे खिलाडी के बारे में कुछ बताता है। सोचिये कि अगर सचिन खुद सौरव, द्रविड़, कुंबले या श्रीनाथ के बारे में कुछ बताये तो उसे सुनने में कितना मजा आएगा। ये पुस्तक अधिकतर गांगुली के ऊपर ही केंद्रित है और साथी खिलाडियों के बारे में बहुत कम लिखा गया है। और तो और सचिन और सौरव की मशहूर जोड़ी के बारे में कुछ नहीं बताया गया कि इसकी नीव कैसे पड़ी। ना ही ये कि जब ये जोड़ी टूट कर सचिन और सहवाग की बनी तो गांगुली को कैसा लगा? ना ही ये कि किस प्रकार गांगुली ने श्रीनाथ को रिटायरमेंट से वापस बुलाया। इसी तरह की कई घटनाएं, छोटी-छोटी चीजें जिसके बारे में पाठक जानना चाहता है, इसमें छूट गयी है। अच्छी बात ये है कि गांगुली के बारे में काफी कुछ है जो उनके प्रशंसकों को पसंद आएगा।

इस पुस्तक की सबसे अजीब बात जो मुझे लगी वो ये कि शुरू से लेकर अंत तक गांगुली इसमें शिकायत करते  नज़र आते हैं। मानो उनके करियर में जो कुछ भी बुरा हुआ उसके लिए दूसरा ही जिम्मेदार हो।

निराशा तब होती है जब हम गांगुली के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण चैपल अध्याय पढ़ रहे हों और हमें सिर्फ वही जानने को मिले जो रात-दिन टीवी पर देखते हैं तो बड़ी निराशा होती है। यकीन मानिये जिन्होंने भी ये पुस्तक सिर्फ इस लिए खरीदी है कि उन्हें ये पता चले कि आखिरकार गांगुली और चैपल के बीच आखिरकार हुआ क्या था, उन्हें भारी निराशा होगी। गांगुली ख़ुद यही कहते नज़र आते हैं कि हर बार उन्हें समझ में ही नहीं आया कि चैपल उनसे खफा क्यों है, या उन्हें टीम से क्यों बाहर कर दिया?
गांगुली ने कई बार अपने डर का ज़िक्र किया है जिसमें कोई बुराई नहीं है पर ये कहना कि डर की वजह से उन्होंने ये नहीं पूछा कि उन्हें बाहर क्यों रखा गया, ये उनकी छवि के विपरीत है। उनकी छवि एक दबंग खिलाडी की है और ऐसी बातें उनसे न्याय नहीं करती। शायद यही आत्मकथा की ख़ासियत होती है।
वे भारत के सबसे सफल कप्तान हैं और ये पढ़ना दिलचस्प है कि उन्होंने अपनी टीम कैसे बनाई लेकिन इसका कोई जिक्र नहीं है कि जब वे वापस आकर उन खिलाडियों के अंदर खेले जिन्हे उन्होंने मौका दिया था, मसलन धोनी, तो उन्हें कैसा लगा?
कुल मिलाकर सौरव गांगुली की आत्मकथा में सिर्फ गांगुली छाए है। इस पुस्तक की सबसे अच्छी बात ये है कि भाषा सरल है,और बिलकुल सीधे शब्दों में कहानी की तरह इसे लिखा गया है। व्यक्तिगत तौर पर मेरा मानना है कि एक आत्मकथा को लिखने के लिए जिस सच्चाई और हिम्मत की जरुरत होती है उसकी थोड़ी कमी नज़र आती है। इसी कारण कई चीजें बनावटी लगती हैं। हालाँकि ये पुस्तक पढ़ने में मज़ेदार है और इसे एक ही बार में पढ़ते हुए ख़त्म किया जा सकता है। जो गांगुली के प्रशंसक हैं उन्हें ये पुस्तक ख़ास तौर पर पसंद आएगी।

समीक्षक — नीलाभ वर्मा

2036

Tarang
Tarang Sinha is a freelance writer & author of 'We Will Meet Again'. Her works have been published in magazines like Good Housekeeping India, Child India, New Woman, Woman's Era, Alive, and a best-selling anthology @ Uff Ye Emotions 2.
http://tarangsinha.blogspot.in/

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