एक परिचय — सिम्मी हर्षिता

‘साहित्य हिसाब नहीं मांगता, परिपूर्णता मांगता है।

सिर्फ स्याही नहीं, खून पसीना मांगता है ,

सांस नहीं मांगता, ज़िन्दगी मांगता है।’  —-   सिम्मी हर्षिता

 

सिम्मी हर्षिता जी, एक लिखिका के तौर पर, कई पुरस्कारों व सम्मानों से नवाज़ी जा चुकी हैं। इनका मानना है कि एक सच्चा लेखक कभी लिखना बंद नहीं कर सकता। एक लेखक और उसका लेखन एक दुसरे के पर्यायवाची होते हैं।

सिम्मी जी एक खूबसूरत और ज़हीन शख़्सियत हैं। उनसे मिलना, बातें करना मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहा।

उनकी पहली कहानी, ‘अपने-अपने दायरे’ 1969 में संचेतना पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। उनकी कहानियों का पहला संकलन, ‘कमरे में बंद आभास’ 1975 में प्रकाशित हुआ। उन्होंने कई लघु कथाएं व उपन्यासों की रचना की है। अपने लेखन के प्रति समर्पण ही उनकी प्रेरणा है। उनकी कहानियों में आपको एक औरत के अंतर्मन की  व्यथा, उनकी ख़ुशी और ख्वाहिशें नज़र आएँगी।

“जलतरंग, जो मेरा सपना था, लिखने में मुझे ख़ासा वक़्त लग गया। संतोष ये है की ये काफी पसंद की गयी। पुरस्कृत भी हुई। ईश्वर से प्रार्थना है कि वो मुझे अच्छा स्वास्थ, शक्ति और सहयोग प्रदान करें ताकि मैं आगे भी लिखती रहूँ।” वो कहती हैं। लिखने के प्रति उनकी लगन को आप उनकी आँखों में देख सकते हैं।

“आप 50 वर्षों से लिखती आ रही हैं। आपको लिखने की प्रेरणा कहाँ से मिलती है? क्या लिखने का कोई ख़ास वक़्त तय किया है आपने? वक़्त के साथ कभी कोई असुविधा महसूस हुई आपको?” मैंने  पूछा

“एक लेखक के लिए रिटायरमेंट का कोई अर्थ नहीं है। जबतक आपकी सोच है, तबतक आप लिखते रहेंगे। मैंने कभी वक़्त या मूड के बारे में नहीं सोचा। मेरे लिए हर समय लिखने का समय है। जब तक ज़िन्दगी चल रही है, कलम भी चलती रहे और मुझे लेखक के रूप में ज़िंदा बनाये रखे। शब्दों के साथ जीने का सुकून मिलता रहे।” सिम्मी हर्षिता जी बड़ी ही खूबसूरती से कहती हैं। उनकी निश्चिंतता और आत्मविश्वास उनकी बातों में झलकता हैं।

चाहे वो ‘बंजारन हवा’ हो या ‘जलतरंग’, या ‘संबंधों के किनारे’, उनकी हर कहानी एक अनूठी ज़िन्दगी जीती हुई नज़र आती हैं — हमारी ताकत और कमज़ोरियों को एक ख़ास तरीके से बयां करती हैं। खासकर, एक औरत और उसकी ज़िन्दगी से सम्बंधित मुद्दों का खूबसूरत चित्रण होता है उनकी कहानियों में। और इस लिहाज़ से, सिम्मी जी एक प्रेरणा-स्रोत हैं।

 

मन्नू भंडारी ने कहा भी है — ‘तुम्हारी भाषा अद्भुत है। तुम्हारी शैली अद्भुत है।’

अपने लेखन के प्रति उनका असीम लगाव, उनकी निष्ठा ने मुझे बहुत प्रभावित किया है, न सिर्फ एक लेखिका बल्कि एक शख़्सियत के तौर पर भी। वो एक सच्ची ‘फेमिनिस्ट’ हैं। जो अपने शब्दों पर खरी उतरती हैं। अपनी शर्तों पर जीती हैं। आवश्यकता पड़ने पर, पुरुषों को चुनौती देने से नहीं हिचकिचातीं।

उन्होंने मुझे मेरे सपनो को जीना और उसका पीछा करना सिखाया है। दुनियां को उनके या उनकी कहानियों के बारे में बताने के पीछे मेरा मक़सद सिर्फ उनसे या उनकी कहानियों से आपका परिचय करना नहीं है, वरन, उनके प्रेरणादायक विचारों को बांटना भी है — ये बताना है की आप अपने अंदर परिवर्तन लाकर ही समाज में किसी परिवर्तन की अपेक्षा कर सकते हैं। अपने विचारों के प्रति दृढ़ रहें।

सिम्मी हर्षिता जी एक प्रभावशाली और दृढ़ विचारों वाली महिला हैं। उन्होंने कई मुश्किलों का सामना बहुत बहादुरी से किया है। कई लोगों के मन और जीवन को छुआ है। उम्र कभी उनके सपनों, संकल्प या मनोबल के बीच नहीं आया।

अगर आप हिंदी साहित्य और अच्छी कहानियों के प्रति रूचि रखते हैं, अगर आप महिलाओं के जीवन की व्यथा, उनकी शक्ति और उनके कश्मकश की गहराई जानना चाहते हैं, तो आपको सिम्मी हर्षिता जी की कहानियां अवश्य पढ़नी चाहिए।

 

इंदरप्रीत उप्पल के साथ साक्षात्कार पर आधारित।

इंदरप्रीत एक लेखिका हैं और एक स्वतंत्र संपादक के तौर पर काम करती हैं। उन्हें पढ़ने का शौक़ है और इस शौक़ को वो पुस्तक समीक्षा के रूप में अभिव्यक्त करती हैं। अभी हाल ही में उन्होंने अपनी किताब, Generously Yours, प्रकाशित की है। उनके बारे में ज्यादा जानने के लिए आप उनके वेबसाइट पर जा सकते हैं।

https://inderpreetuppal.com/

 

 

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Tarang
Tarang Sinha is a freelance writer & author of 'We Will Meet Again'. Her works have been published in magazines like Good Housekeeping India, Child India, New Woman, Woman's Era, Alive, and a best-selling anthology @ Uff Ye Emotions 2.
http://tarangsinha.blogspot.in/

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