पुस्तक समीक्षा: द फिलॉसॉफर्स स्टोन — प्रेम एस गुर्जर

‘लोग आगे बढ़ने में इतना डरते क्यों हैं? किनारे से ही हार मान लेना कितना सरल है। बहुत कम लोग होते हैं जो पूर्ण निष्ठा से अपनी नियति को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। ‘ प्रेम एस गुर्जर  , फिलॉसोफेर्स स्टोन फिलॉसॉफर्स स्टोन कहानी है एक चरवाहे की जो अलग अलग तरह की किताबों

चंद बातें: अंकिता जैन

  'कितना ही दूर रह लो, लेकिन अपने गाँव की भाषा चुटकियों में आपको गाँव से जोड़ देती है।' अंकिता जैन, ऐसी वैसी औरत  अंकिता जी एक उभरती हुई लेखिका हैं। इनकी लिखी हुई कविताएँ, कहानियाँ, और लेख अख़बारों और ऑनलाइन पोर्टल में नियमित प्रकाशित होते रहते हैं। इन्होने रेडियो-ऍफ़एम् के दो प्रसिद्ध

चंद बातें — प्रेम एस गुर्जर

'लोग आगे बढ़ने में इतना डरते क्यों हैं? किनारे से ही हार मान लेना कितना सरल है। बहुत कम लोग होते हैं जो पूर्ण निष्ठा से अपनी नियति को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। ' प्रेम एस गुर्जर  , फिलॉसोफेर्स स्टोन ‘‘जिन्दगी जीने के केवल दो ही तरीके हैं। एक ऐसे

पुस्तक समीक्षा: ऐसी वैसी औरत — अंकिता जैन

  'मेरी खिड़की के सामने कोई खिलता ग़ुलाब, जो आज़ाद हो मुरझाने की हर ज़िद से, शायद, किसी रात की तेज़ आंधी, जो उड़ा ले जाए सारे टूटे-बिखरे ख्याल। या नर्म उँगलियों का सुकून जो सुलझा सके मेरे गुच्छे में उलझे सवाल।'   अंकिता जैन जी की ऐसी वैसी औरत एक कहानी संग्रह है, और जैसा की इसके शीर्षक

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