पुस्तक समीक्षा: मसाला चाय —दिव्य प्रकाश दुबे

“एक उम्र होती है जब क्लास की खिड़की से बाहर आसमान दूर कहीं जमीन से मिल रहा होता है और हमें लगता है कि शाम को खेलते-खेलते हम ये दूरी तय कर लेंगे। दूरी तय करते-करते जिस दिन हमें पता चलता है कि ये दूरी तय नहीं हो सकती, उसी दिन हम बड़े हो जाते हैं।”

—मसाला चाय

अगर आप चाय पीना पसंद करते हैं, तो आप ये समझ सकते हैं कि कहानियां सुबह की चाय की तरह होती हैं जो आपको ताज़गी से भर देती हैं। मसाला चाय शीर्षक सुनकर मेरे ज़ेहन में सबसे पहले यही बात आई, क्योंकि दिव्य प्रकाश दुबे जी ‘मसाला चाय’ कहानियों का एक संग्रह है। 

कहानी संग्रह की एक ख़ास बात होती है — हो सकता है कि आपको सारी कहानियां पसंद आये, पर ऐसा नहीं हो सकता कि आपको कोई भी कहानी अच्छी न लगे।

 हिंदी युग्म  द्धारा प्रकाशित मसाला चाय को लेखक ने युवा वर्ग को ध्यान में रखकर लिखा है। ऐसा कहने की दो वजहें हैं — पहला, दिव्य जी के लिखने का चिर -परिचित, हल्का-फुल्का अंदाज़, जिससे युवा वर्ग झट से जुड़ जाता है। दूसरा, कहानियां, जो एक स्कूल के बच्चे से लेकर अपनी करियर/मंजिल या अपने प्यार की तलाश में जुटे युवकों की कहानियां कहती है। 

‘झूठी कसम नहीं खानी चाहिए। और अगर खानी ही पड़े तो सबसे सेफ भगवान् कसम होती है।’

विद्द्या कसम, Keep Quiet और ‘केवल बालिगों के लिए’ ऐसी कहानियां है जो आपके बचपन और स्कूल के जीवन और उस दौरान बच्चों के मन में चल रहे उहापोह की याद दिलाएगी।

jeevansaathi.com, Love You Forever और Ted Tea ऐसी कहानियां हैं जो युवाओं के रिलेशनशिप्स और उसमें अक्सर होने वाली उलझनों को बहुत ही दिलचस्प तरीके से दर्शाती  है। पहली मुलाक़ात का खुशनुमा एहसास, एक दूसरे को मनाना, एक दूसरे की बात को बिन कहे समझ जाना, और फिर दूरी का ग़म। सबकुछ है इन् कहानियों में। 

‘Fill in the Blanks’, ‘Time’ और ‘हम दो, हमारा एक’ थोड़ी अलग और मेरी पसंदीदा कहानियां हैं। एक अकेली माँ, करियर की अनिश्चित्ताओं से दो चार होता एक युवक, और एक अलग तरह के रिश्ते की उलझनों से जूझता युवक। इनमें अन्य कहानियों की अपेक्षा ज्यादा गहराई है। थोड़ी गंभीरता है। 

‘कई रिश्ते सिर्फ इसलिए बचे रहते हैं या लम्बे चलते हैं क्योंकि उसमें वही कहा जाता है जो दूसरा सुनना पसंद करता है।’

बहुत सारी कहानियों के शीर्षक से आप शायद अंदाजा लगा लेंगे कि कहानियों में अंग्रेजी शब्दों का बहुत ज्यादा प्रयोग किया गया है। कुछ कहानियों में तो कई कई वाक्य और संवाद अंग्रेज़ी में हैं। ये बात मुझे इतनी पसंद नहीं आई। कहानी पढ़ते वक़्त, ये बात कुछ हद तक मुझे परेशान कर रही थी। ‘नयी वाली हिंदी’ मैं समझ सकती हूँ, मगर हिंदी कहानियों में अंग्रेजी शब्दों/वाक्यों का अत्यधिक प्रयोग उन् कहानियों की सुंदरता और गहराई को कुछ हद तक चुरा लेता है। हालाँकि, अंग्रेजी का एक कथन मुझे बहुत पसंद आया। 

‘Life is not about distance, it’s about direction.’

कुछ कहानियां मुझे थोड़ी दिशाहीन लगीं जैसे —‘फलाना college of engineering’. ये एक बहुत लम्बी कहानी है पर मेरी समझ नहीं आया की ये कहना क्या चाहती थी। वैसे ही ‘Keep Quiet’ स्कूली बच्चों और उनके मन में चलते अंतर्द्वंद की कहानी है। ये कहानी थोड़ी बिखरी-बिखरी सी लगी। 

कुल मिलकर, ये एक अच्छा संग्रह है। अगर आप युवा हैं, अगर आप हलकी-फुल्की कहानियां पढ़ना पसंद करते है, तो आपको ये किताब जरूर पढ़नी चाहिए। अगर आप हिंदी साहित्य में भाषा की गहराई ढूंढते हैं, तो शायद आपको ये किताब इतनी पसंद न आये। पर जैसा कि मैंने पहले कहा कि –‘कहानी संग्रह की एक ख़ास बात होती है — हो सकता है कि आपको सारी कहानियां पसंद आये, पर ऐसा नहीं हो सकता कि आपको कोई भी कहानी अच्छी न लगे।’ 



23

Tarang
Tarang Sinha is a freelance writer & author of 'We Will Meet Again'. Her works have been published in magazines like Good Housekeeping India, Child India, New Woman, Woman's Era, Alive, and a best-selling anthology @ Uff Ye Emotions 2.
http://tarangsinha.blogspot.in/

Leave a Reply

Top